'मरेंगे तो वहीं जाकर जहां जिंदगी है..' आपने सुनी मजदूरों पर गुलज़ार की कव‍िता!

प्रवासी मजदूर/कामगार (Migrant Worker) बस-ट्रेन शुरू हों, इस इंतजार के लंबा होने के बाद पैदल ही अपने-अपने गांवों की तरफ बढ़ गए हैं. इसी पर हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध लेखक गुलज़ार (Gulzar) ने अपनी कविता ल‍िखी है.

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